ज़िला जज अरविंद कुमार ने क़रीब डेढ़ साल बाद यह फ़ैसला सुनाया. दोनों अभियुक्त जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई में शामिल हुए और पूरे समय चुप रहे.

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