एक कुरकुरे, खोखले खोल के अंदर दबा ये स्वाद का एक नन्हा धमाका है
मूल प्रकाशन Global Voices हिन्दी में

धनिया पत्ती और चटनी से सजाई गई पानी पूरी की एक प्लेट। छवि विकिमीडिया कॉमन्स से श्रुति612 द्वारा CC BY-SA-4.0
अपने हलचल भरे मेट्रो शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों और इनके बीच हर जगह मिलने वाले किफायती और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड की विविधता के लिए भारत मशहूर है। इनमें से, पानी पूरी सबसे पसंदीदा और सुलभ चटपट स्नैक्स में से एक है। इसकी व्यापक लोकप्रियता इस बात से साफ है कि यह न केवल भारत में, बल्कि बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान जैसे अन्य दक्षिण एशियाई देशों में भी लोकप्रिय है।
एक कुरकुरा नमकीन अल्पाहार
पानी पूरी भारत के सबसे मशहूर स्ट्रीट फूड में से एक है, जो एक कुरकुरे, खोखले खोल के अंदर स्वाद का एक छोटा सा धमाका है। ये गहरे तले हुए, सुनहरे गोले, जिन्हें ‘पूरी‘ कहा जाता है, आमतौर पर मसालेदार आलू, छोले, कच्चे प्याज और कई तरह के चटपटे मसालों के मिश्रण से भरे होते हैं। फिर इन गोलों को एक स्वादिष्ट पानी (जलजीरा) में डुबोया जाता है जो हर कौर को ज़ायकेदार बना देता है।
हालांकि इस पसंदीदा स्नैक की सटीक उत्पत्ति अभी भी बहस का विषय है, और इसके बारे में कई किंवदंतियां हैं, एक अधिक विश्वसनीय स्रोत के अनुसार इसकी उत्पत्ति प्राचीन मगध साम्राज्य (ईसा पूर्व 544-322) से हुई है, जो आज के उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य बिहार में स्थित था। महाकाव्य महाभारत की एक लोकप्रिय कहानी में वर्णन है कि द्रौपदी (महाकाव्य की नायिकाओं में से एक), जिन्हें सीमित संसाधनों के साथ पांच पांडव भाइयों को खाना खिलाने का काम सौंपा गया था, ने प्रत्येक के लिए बराबर हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए इसका आविष्कार किया था। खाद्य इतिहासकारों का मानना है कि इसका सबसे पहला रूप, जिसे फुल्की के नाम से जाना जाता है, सर्वप्रथम मगध में सामने आया था। ये छोटी, खोखली पूरियां थीं जो मसालेदार पानी से भरी होती थीं; एक सरल लेकिन शानदार विचार जो सदियों से विकसित होकर आज की पसंदीदा पानी पूरी बन गया है।
शहरी इलाकों की व्यस्त सड़कों से लेकर ग्रामीण भारत के शांत कोनों तक, पानी पूरी को कई नामों से जाना जाता है, जैसे पानी के बताशे, गोलगप्पा, फुचका और गुपचुप – हर एक का अपना क्षेत्रीय स्वाद है। लेकिन कोई इसे कुछ भी कहे, उस पहले, स्वादिष्ट कुरकुरे कौर का आनंद जिसके बाद मसालेदार, चटपटे पानी का स्वाद आता है जो देर तक बना रहता है, उसे नकारा नहीं जा सकता।
यह स्नैक भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी तैयारी और सामग्री में काफी भिन्न होता है। पूर्वी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा में, इसे आमतौर पर फुचका के नाम से जाना जाता है। फुचका की मुख्य फिलिंग (भरावन) “घुघनी” होती है, जो काले चने या मसालेदार मटर का मिश्रण होता है, जो इसे एक खास क्षेत्रीय स्वाद देता है।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे उत्तरी राज्यों में, पानी पूरी को गोल गप्पा कहा जाता है। इस रुपांतरण में आमतौर पर मसले हुए आलू की भरावन होती है और इसे चटपटे इमली के पानी के साथ परोसा जाता है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे पश्चिमी राज्यों में, पानी पूरी का क्लासिक संस्करण ज़्यादा प्रचलित है। इसमें हरे या सफेद मटर की भरावन होती है, साथ में पुदीना-धनिया का मसालेदार पानी और मीठा इमली-गुड़ का पानी होता है, जो अलग अलग स्वाद का एक शानदार संतुलन प्रस्तुत करता है।
फेसबुक पर, भारतीय सेलिब्रिटी शेफ संजीव कपूर ने पानी पूरी की एक रेसिपी पोस्ट की, जिससे पता चलता है कि भले ही फुचका बनाने का तरीका हर क्षेत्र में अलग-अलग हो, फिर भी ये लाजवाब और स्वादिष्ट होते हैं।
दुनिया भर में पहुँच चुकी है पानी पूरी
पानी पूरी की पहुँच और लोकप्रियता अब सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है। हाल के सालों में, इस मशहूर स्ट्रीट फूड को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीय (NRI) समुदाय स्थानीय भारतीय रेस्तरां में पानी पूरी का आनंद लेते हैं और गर्व से इसे फूड फेस्टिवल्स में प्रदर्शित कर इसके जीवंत और लाजवाब स्वाद को दुनिया भर के लोगों तक पहुँचाते हैं।
अप्रैल 2025 में, हंगरी के बुडापेस्ट में एक विश्विद्यालय के छात्रों के एक समूह ने पहली बार पानी पूरी खाई और उत्साह से इसके स्वादिष्ट स्वाद और अनोखे फ्लेवर की तारीफ़ की। इसी तरह, जून 2024 में, मिनियापोलिस, USA में एक भारतीय स्वामित्व वाले रेस्तरां करी कॉर्नर ने लोगों को मुफ्त में पानी पूरी खिलाई और इस वाकये का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। 3.9 मिलियन व्यूज़ के साथ यह जल्दी ही वायरल हो गया जिससे इस डिश की लोकप्रियता में काफी बढ़ोतरी हुई।
करी कॉर्नर (@currycornermn) ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें पानी पूरी पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ दिखाई गईं:
मार्च 2023 में, जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भारत यात्रा के दौरान पानी पूरी का स्वाद चखा और इसके जीवंत स्वादों का आनंद लिया। उसी साल, भारत में जापान के राजदूत हिरोशी सुजुकी ने वाराणसी में पानी पूरी सहित भारतीय स्ट्रीट फूड का आनंद लिया और इसकी असाधारण पाक कला की तारीफ़ की।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पल को X पर शेयर किया, और भारत के स्ट्रीट फूड कल्चर के लिए बढ़ती ग्लोबल तारीफ़ पर ज़ोर दिया:
This is one contest you may not mind losing, Mr. Ambassador. Good to see you enjoying India’s culinary diversity and also presenting it in such an innovative manner. Keep the videos coming! https://t.co/TSwXqH1BYJ
— Narendra Modi (@narendramodi) June 11, 2023
यह एक ऐसा मुकाबला है जिसे हारने में आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, मिस्टर एम्बेसडर। आपको भारत की खाने की वैरायटी का आनंद लेते और उसे इतने अभिनव तरीके से पेश करते हुए देखकर अच्छा लगा। वीडियो भेजते रहिए! https://t.co/TSwXqH1BYJ
— नरेंद्र मोदी (@narendramodi) 11 जून, 2023
जैसे-जैसे पानी पूरी की लोकप्रियता दुनिया भर में फैल रही है, वैसे-वैसे इसका उद्भव भी हो रहा है। यह स्नैक रचनात्मक फ्यूजन के लिए एक कनवास बन गया है, जो इसके पारंपरिक क्रंच (कुरकुरेपन) को अंतर्राष्ट्रीय स्वाद के साथ मिलाता है। एक लोकप्रिय मैक्सिकन-भारतीय फ्यूजन संस्करण में पारंपरिक आलू की भरावन को मसालेदार फलियाँ और चटपटे साल्सा से बदल दिया जाता है। इसी तरह, एक इतालवी शैली की पानी पूरी भी मौजूद है, जो इस व्यंजनकी शानदार बहुमुखी प्रतिभा और नए स्वादों के साथ ढलने की क्षमता दिखाती है।
2023 में, गूगल ने एक शानदार विश्व रिकॉर्ड का सम्मान करने हेतु 12 जुलाई को एक इंटरैक्टिव गूगल डूडल के साथ “पानी पूरी दिवस” के रूप में मनाया। 2015 में इसी तारीख को, इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक रेस्तरां, इंदौरी ज़ायका ने पानी पूरी के 51 अनोखे फ्लेवर परोसकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया, जो इस व्यंजन की व्यापक अपील को दिखाता है।

पानी पूरी और रूढ़िवादिता
अपनी व्यापक लोकप्रियता के बावजूद, भारत में पानी पूरी लिंग पूर्वाग्रहों और रूढ़िवादिता से मुक्त नहीं है। कई लोग इसे “लड़कियों का स्नैक” मानते हैं, अक्सर पानी पूरी स्टॉल पर पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं को देखा जा सकता है। द वायर द्वारा प्रकाशित एक लेख में इस रूढ़िवादिता का कारण सामाजिक मानदंडों, सांस्कृतिक अपेक्षाओं और सार्वजनिक स्थानों तक महिलाओं की सीमित पहुंच को बताया गया है। हालांकि, असंख्य पुरुष भी पानी पूरी पसंद करते हैं, जो इसकी सार्वभौमिक अपील को उजागर करता है और इसे सभी द्वारा पसंद किए जाने वाले जेंडर न्यूट्रल (लिंग-तटस्थ) स्नैक के रूप में स्थापित करता है।
पानी पूरी के बारे में एक आम रूढ़िवादिता यह है कि सड़क किनारे की दुकानों में सामग्री की तैयारी अक्सर अस्वच्छ तरीके से होती है। हालांकि, रेगुलेटेड स्टॉल और घर पर बने संसकरण में फिल्टर किए हुए पानी और ताज़ी सामग्री का उपयोग करके सुरक्षा को प्राथमिकता दिया जाता हैं, जिससे दूषितकरण की चिंताओं को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सके। इसके अलावा, हाल के वर्षों में, कई फेरीवालों ने दस्ताने पहनना और साफ बर्तनों का उपयोग करना जैसी बेहतर स्वच्छता प्रथाओं को अपनाना शुरु किया है, जिससे ग्राहकों के लिए एक सुरक्षित और अधिक सुखद अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।
लोकप्रिय दक्षिण कोरियाई यूट्यूबर म्योची, उर्फ ह्योजियोंग पार्क ने भारत यात्रा के दौरान अपने पहले पानीपूरी अनुभव के बारे में X पर पोस्ट किया।
I tried my first Pani Puri in India
And it was freeee
pic.twitter.com/AvEyU7eEMu
— Mhyochi (@mhyochi) December 3, 2022
मैंने भारत में पहली बार पानी पूरी खाई और यह मुफ़्त थी
pic.twitter.com/AvEyU7eEMu
— म्योची (@mhyochi) December 3, 2022
पानी पूरी भौतिक सीमाओं को पार करते हुये परंपरा को वैश्विक अपील के साथ सहजता से मिलाती है। सिर्फ एक स्नैक से कहीं ज़्यादा, यह सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, दोस्तों के साथ शाम की चटपटी दावतों की प्यारी यादें ताज़ा करती है, और जीवंत चर्चाओं को जन्म देती है। समय के साथ, यह पॉपुलर कल्चर (लोकप्रिय संस्कृति) का हिस्सा बन गया है, लोग अपने पहले अनुभव वाले वीडियो, मीम्स और गाने बनाकर पानी पूरी के लिए अपना लगाव ज़ाहिर करते हैं जो इसके आकर्षण को दर्शाते हैं।
पानी पूरी की अपील इसकी साधारण सी सामग्री से कहीं ज़्यादा है, यह कई भारतीयों के लिए खुशी और साथ बिताई गई यादों का एक मज़बूत प्रतीक है।

And it was freeee





