इस हिंसा में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों को भीड़ ने ज़िंदा जला दिया था. भीड़ का नेतृत्व करने का दोषी दारा सिंह को ठहराया गया था. घटना के 27 साल बाद यहां के लोगों ने क्या बताया?

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