अफ़ग़ानिस्तान की साइक्लिस्ट ने अपने देश में उत्पीड़न के डर के बावजूद अपने खेल के सपने को पूरा करने का फ़ैसला किया था. इसके लिए उन्हें अपनी पहचान भी छिपानी पड़ी.

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