Jamaat-e-Islami कहते हैं कि कई लोग चित्तगांववादी मार्च में अपनी सफलता के कारण अपने सिर खो चुके हैं। इसके कुछ संकेत दो दिनों के लिए पूंजी में दिखाई देते हैं। उन्हें परेशान न होने दें और सार्वजनिक मांग को स्वीकार न करें।

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