बरसी पर की गई टिप्पणी के कारण उन्हें ख़ास तौर पर तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा. आलोचकों ने कहा कि बुधवार ऐसा मौक़ा था, जब निर्वाचित नेताओं को विभाजनकारी बयानबाज़ी से बचना चाहिए.

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