आज 26 साल बाद भी सोशल मीडिया की चमक-दमक, कॉरपोरेट जगत की चकाचौंध और ‘नए भारत’ के सरकारी नारों के बीच भारतीय खिलाड़ियों के हालात में, कम से कम शुरुआती दिनों में, कोई फ़र्क़ नहीं आया है.

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